1. उद्घाटन सत्रों, सेमिनारों, कार्यशालाओं और सम्मेलनों के लिए प्रस्तुति/भाषण की तैयारी।
2. विद्युत क्षेत्र में विभिन्न समितियों, परिषदों आदि से जुड़ाव।
3. संसद के प्रश्नों, वीआईपी और एमओपी, ऊर्जा, बिजली उपयोगिताओं आदि पर स्थायी समिति के संदर्भों के लिए सामग्री/उत्तर तैयार करना।